कुछ तो कमी थी आपके बिना ,
मानो संसार की हर रुख सी बदल गई थी ,
धुप , छाया , बार्रिश मानो हमसे हमेशा के लिए किसी ने छीन लिया था ,
आखिर ज़िन्दगी बतर से भी बतर बन चुकी थी ।
जब आप हमारे साथ थे तब एक मेहसूस होता था की मे मेहफुज हु ,
कायनात की कोई ऐसी चीज नहीं है जो हमे आपसे जुदा कर सके ,
कितने खुश थे ना हम ?
मानो ज़िन्दगी जीने का मजा ही कुछ और था ।
पर ज़िन्दगी हमारे साथ एक एक कदम पर हमारी इम्तेहान ले राहा था ,
आखिर कब तक इस इम्तेहान को जारी रखता ,
इतनी बड़ी भीड़ मे कहाँ खोजता आपको ,
कहते है दिल मे सिद्धत हो तो कोई भी खोई हुई चीज मिलजाती है ।
आज भी उस राह मे बैठा हु की आप लौट आओगे ,
और कहोगे की फकर्र है तमपर मेरे बीना तमने कर दिखाया ,
बस इसी बात को मरने से पहले सुन लू ना ,
मन ही मन ही कहूंगा मजा आगया, मजा आगया
ज़िन्दगी जीके ...!!
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