Wednesday, 21 March 2018

कुछ तो कमी थी


कुछ  तो कमी थी आपके बिना ,
मानो  संसार  की  हर  रुख  सी  बदल  गई  थी ,
धुप , छाया , बार्रिश  मानो  हमसे  हमेशा  के  लिए  किसी  ने  छीन  लिया  था ,
आखिर  ज़िन्दगी  बतर  से  भी  बतर  बन  चुकी  थी । 

जब  आप  हमारे  साथ  थे  तब  एक  मेहसूस  होता  था  की  मे  मेहफुज  हु ,
कायनात  की  कोई  ऐसी  चीज  नहीं  है  जो  हमे  आपसे  जुदा  कर  सके ,
कितने  खुश  थे  ना  हम ?
मानो  ज़िन्दगी  जीने  का  मजा  ही  कुछ  और  था । 

पर  ज़िन्दगी  हमारे  साथ  एक  एक  कदम  पर  हमारी  इम्तेहान  ले  राहा  था ,
आखिर  कब  तक  इस  इम्तेहान  को  जारी  रखता ,
इतनी  बड़ी  भीड़  मे कहाँ  खोजता  आपको ,
कहते  है  दिल  मे  सिद्धत हो  तो  कोई  भी  खोई  हुई  चीज  मिलजाती  है । 

आज  भी  उस  राह  मे  बैठा  हु  की  आप  लौट  आओगे ,
और  कहोगे  की  फकर्र  है  तमपर  मेरे  बीना  तमने  कर  दिखाया ,
बस  इसी बात  को  मरने  से  पहले  सुन  लू  ना ,

मन ही  मन  ही  कहूंगा  मजा  आगया,  मजा  आगया  ज़िन्दगी  जीके ...!!



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