एक नई उमंग ,
एक नई उड़ान ,
एक नया साहस ,
आसमान को छुने का ।
तोरड़के के सारी जंजीरो को ,
दूर कही चली जाऊ ना मे ,
जहा मे और मेरा बेबस दिल ,
जहाँ दुःख और दर्द को भूल चुकी हु ,
चली मे आसमान को छूने को ।
चली मे हवा के संग झूमने ,
झुम झुम कर बर्रिश के साथ भीगने ,
पेड़ो के साथ अपने आप को झिलमिलाने ,
तूफान मे अपने आप को सँभालने ,
चली मे आसमान को छूने को ।
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