Sunday, 25 March 2018

एक आज़ाद पंछी



एक नई उमंग ,
एक नई उड़ान ,
एक नया साहस ,
आसमान को छुने का । 
       
तोरड़के के सारी जंजीरो को ,
दूर कही चली जाऊ ना मे ,
जहा मे और मेरा बेबस दिल ,
जहाँ दुःख और दर्द  को भूल चुकी हु ,
चली मे  आसमान को छूने को । 

चली मे हवा के संग झूमने ,
झुम झुम कर बर्रिश के साथ भीगने  ,
पेड़ो के साथ अपने आप को झिलमिलाने ,
तूफान मे अपने आप को सँभालने ,


चली मे  आसमान को छूने को । 

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