अकेला था और मायूस भी था ,
सोचा कोई ना कोई हमसफर मिलजाए ,
हा हमसफर तो बहुत मिल गए ,
पर मेरी दिल की बात समज ने वाला कोई ना था ,
किससे इज़्हार करता अपने मन की बात जहाँ कोई सुननेको तईयार ही ना था ,
जब अपनों ने साथ छोड़ दिया ,
तब समज मे आया की इस मंजिल की तलाश मे अकेला हूँ ,
जब मंज़िल की खोज मे निकल पड़ा मानो मुझे हर जगह अँधेरा दीखता था ,
मानो रोशनी नाम की चीज इस ब्रहमांड से लुपत हो चुकी थी ,
बस चलता राहा चलता राहा एक ही उम्मीद लेकर ,
की कोशीश करने वालो की कभी हार नही ....!!
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