काश अगर हमारे आँखो मे आँसू ना होते ?
तब शायद हमारे दुःख और दर्द सूखे बन्जर ना बन जाते ,
सब अपने दुःख और दर्द को अपने दिल के कोने मे समेट लेते .
जब आँखो से आँसू निकल जाती है तो दिल हलका हो जाता है ,
पर ये आँसू भी ना रुकते नहीं है ,बहुत रोकने की कोशीश की ,
पर वो एक एक बूंद आँसू ना कुछ बोलना चाहते है , कुछ पाना चाहते है ,
उस एक एक बूंद आँसू मे एक उम्मीद की किरन छीपी होति है ,
जो उसके जिंदगी से छीन लिया जाता है .
काश अगर उस एक एक बूंद आँसू की भाषा समज लेते ,
तब शायद उसके चहरे पर मुस्कराहट की एक किरण प्रजवलित होती ,
आँसू समज ने वाले बोहत कम है , पर आँसू के साथ खेलने वाले बहुत है। ...!!!
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